संस्कार व मनुष्य निर्माण कला के पारिखी थे गुरु दक्ष : मनोहर

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मुख्यमंत्री बोले, गुरु दक्ष थे सबसे कौशल कारीगर, अंत्योदय केंद्रों के जरिये आम जन तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ, धर्मशाला सभा को दी 22 लाख की अनुदान राशि, किरमच रोड़ पर गुरु दक्ष प्रजापति के नाम पर बनेगा भव्य चौंक, धर्मशाला सभा ने सौंपा 10 सूत्रीय मांग पत्र, धर्मशाला क्षेत्र में सीवरेज व्यवस्था को किया जाएगा चालू<
>कुरुक्षेत्र।< मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि ब्रह्मा जी ने मनुष्य निर्माण किया था, लेकिन गुरु दक्ष प्रजापति ने उन्हीं पंच तत्वों से मनुष्य के जीवन को उपयोगी बनाया। गुरु दक्ष प्रजापति संस्कार व मनुष्य निर्माण कला के पारिखी थी। यदि किसी को अनुशासन एवं निर्माण की कला सीखनी है तो वे कुंभकार से कौशल प्राप्त कर सकते हैं। जिस तरह एक कुंभकार घड़े को सुंदर एवं सुडौल बनाने के लिए मेहनत करता है, उसी तरह समाज निर्माण की सीख लेनी चाहिए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल मंगलवार को प्रजापति धर्मशाला में गुरु दक्ष प्रजापति राष्ट्रीय जयंती समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इस जयंती समारोह में धर्मशाला की कार्यकारिणी की ओर से मुख्यमंत्री का बड़ी माला पहनाकर एवं पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने शिक्षा, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में सराहनीय प्रदर्शन करने वाले लोगों को स्मृति चिन्ह व प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को नई पहचान मिली है, उसी तरह विश्व युवा कौशल दिवस 15 जुलाई को मनाया गया है। सही मायने में गुरु दक्ष प्रजापति सबसे पहले कौशल कारीगर थे। उन्होंने मनुष्य के जीवन को सरल बनाने के लिए घड़े का निर्माण किया। यही नहीं विज्ञान का अविष्कार भी कुंभकार समाज ने किया। चाक को इजाद करके अभिकेंद्रीत बल को नए अविष्कार के रूप में प्रयोग किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह कुंभकार घड़े निर्माण में अनुशासन एवं सयंम बरता है, वह समाज के लिए प्रेरणा है। समाज निर्माण के लिए अनुशासन की कला कुंभकार से सीखनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों से लेकर शिक्षकों को भी अनुशासन एवं संस्कारों की कला सीखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुंभकार की कम होती प्रतिभा को फिर से दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और दक्ष प्रजापति महाराज द्वारा मिट्टïी के बर्तन बनाने की कला को आगे बढ़ाने के लिए पलवल में स्थापित कौशल विकास विश्वविद्यालय से मिट्टी के बर्तन बनाने, खिलौने, सजावटी समान इत्यादि के कोर्स शामिल किए गए है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सरकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के लिए अंत्योदय एवं सरल केंद्रों की शुरूआत की है, अब तक एक करोड़ आवेदन इन केंद्रों के माध्यम से आ चुके हैं। अंत्योदय केंद्रों का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग अभी भी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, इसके लिए सभी सरकार प्रयासरत है। इस मौके पर सांसद नायब सिंह सैनी, थानेसर विधायक सुभाष सुधा, लाडवा विधायक डा. पवन सैनी, जिला परिषद चेयरमैन गुरदयाल सुनहेड़ी, धर्मशाला सभा प्रधान भवानी दास, कोषाध्यक्ष ऋषिपाल अमीन, रामकुमार रंबा, महासचिव नकुल, चेयरमैन बलबीर सिंह, दर्शन लाडवा, सुरेंद्र उड़ाना, श्याम लाल जांगड़ा, एचसीएस राजेश प्रजापत सहित बड़ी संख्या में प्रजापति समुदाय के लोग मौजूद रहे।

धर्मशाला सभा ने सौंपा 10 सूत्रीय मांग पत्र > धर्मशाला सभा ने इस्तेमाल में मिली कुम्हार समाज को गैर मुमकिन पंजावा व कुम्हारदना की भूमि का मालिकाना हक दिया जाए। गुरु दक्ष प्रजापति महाराज के नाम से शिक्षण संस्थान के लिए 5 एकड़ भूमि, जन संख्या के आधार पर राजनीति में भागेदारी देने के साथ अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल को डीएसपी बनाने, पिछड़े वर्ग की आय सीमा भारत सरकार के अनुसार देने, धर्मशाला में 30 केवी का सोलर प्लांट व एक शैड, बर्तन बनाने के लिए समाज को एक से पांच एकड़ भूमि देने, मिट्टी कला बोर्ड को सथायी बनाने व बजट देने, प्रजापति समुदाय को अनूसूचित जाति में शामिल करने व किसी भी सरकारी शिक्षण संस्थान का नाम महाराजा गुरु दक्ष प्रजापति रखने की मांग की गई। मुख्यमंत्री ने प्रजापति समुदाय को आश्वासन दिया कि सभी मांगों को समय के अनुसार पूरा किया जाएगा। >समाज के मार्गदर्शक होते हैं संत : गंगवा पूर्व राज्यसभा सांसद एवं विधायक रणबीर गंगवा ने कहा कि संत किसी समुदाय के नहीं होते हैं, संत समाज के मार्गदर्शक होते हैं। प्रजापति समाज मेहनतकश कौम है। मगर अभी उसे राजनीतिक भागेदारी नहीं मिल पाई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने समाज को नई पहचान दिलाने का काम किया है।

महापुरुषों एवं संतों को सरकार ने किया सम्मान दिलाने का काम : नायब सैनी लोकसभा सांसद नायब सैनी ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहली बार महापुरुषों एवं संतों की जयंतियां सरकारी तौर पर मनाकर संतों को सम्मान दिलाने का काम किया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने समाज के सभी संतों की जयंतियों में शिरकत की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार को समाप्त कर नई मिसाल पेश की है और सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में समान विकास कार्य हुए हैं। माटी कला बोर्ड के चेयरमैन कर्ण सिंह रानौलिया ने कहा कि सरकार ने क्षेत्रवाद व भ्रष्टाचार की परंपरा को तोड़े हुए पारदर्शिता की मिसाल कायम की। भाजपा सरकार से पहले प्रदेश में क्षेत्रवाद, परिवारवाद व भाई भतीजावाद का बोलबाला था। मगर अब नौकरियां योग्य युवाओं को योग्यता के आधार पर मिल रही हैं, जो पारदर्शिता की सबसे बड़ी पहचान है।

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