धर्म का मत बना खिलौना : नरेश आकाश

घर जीवन, बाहर मरण, लॉक डाऊन है समझ। लाभ-हानि के क्रय-विक्रय धरे रह जायेगे तू समझ।। माटी की देह है, माटी का बिछौना! मरकज में बैठ कर मत बना धर्म का खिलौना! मानवता सबसे बडा…

आग लगाने वाले सुन ले हम इतने मासूम नहीं : सुदीप भोला

कौन नाग है कौन नागरिक हिंदुस्तान समझता है,  जीवीएम में 9वां अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन गंभीर मंथन और ठहाकों के बीच हुआ संपन्न [caption id="attachment_31197" align="alignnone" width="1000"] रणबीर सिंह रोहिल्ला, सोनीपत। जहर और अमृत…