मांगों को लेकर यूनियन नेताओं की नारेबाजी

मांगों को लेकर यूनियन नेताओं की नारेबाजी

कर्मचारी नेता विश्राम गृह से प्रदर्शन करते हुए निगम आयुक्त कार्यालय पर पहुंचे

रणबीर रोहिल्ला, सोनीपत। ऑल हरियाणा पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल कर्मचारी यूनियन संबंधित हरियाणा कर्मचारी महासंघ जल स्वास्थ्य अभियंत्रिकी शाखा सोनीपत ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज विश्राम गृह प्रांगण में सैकड़ों की संख्या में एकत्रित होकर प्रदर्शन करते हुए नगर निगम आयुक्त कार्यालय के समक्ष पहुंचे। प्रदर्शन का नेतृत्व ऑल हरियाणा पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान रणबीर दलाल, ब्रांच प्रधान रामचंद्र, चेयरमैन विनोद योगी, वरिष्ठ उप प्रधान मुकेश बिडा, नवीन शर्मा, मुख्य संगठनकर्ता मुकेश कुमार, शाखा कैसियर राजकुमार ने किया।

कर्मचारी नगर निगम के प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निगमायुक्त के कार्यालय के समक्ष पहुंचे। सभी नेताओं ने निगम प्रशासन से मांग की कि जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी के जो 73 आदमी प्रतिनियुक्ति पर निगम में बाकी है, उन्हें स्थानीय निकाय एवं जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी के मुख्यालय के आदेशानुसार तुरंत प्रभाव से कार्यमुक्त कर उनके मूल विभाग में भेजा जाए। धरने को संबोधित करते हुए शाखा सचिव ने कहा कि निगम प्रशासन सितंबर 2017 से लगातार प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। उनको विभाग द्वारा मिलने सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। नगर निगम ने अपने कर्मचारियों को ब्लॉक 2020 -23 एलडीसी का भुगतान कर दिया है और प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों को एलटीसी गेहुआ अग्रिम  से वंचित रखा गया है। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों को मूल विभाग द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं जैसे साबुन, जूते, डांगरी, बरसाती आदि से भी वंचित रखा जा रहा है।

नगर निगम प्रशासन में भ्रष्टाचार प्राप्त होने के कारण नगर निगम प्रशासन जलापूर्ति का टेंडर लगाने में असफल रहा है। जिसके कारण मुख्यालय के आदेश होने के बावजूद प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों को कार्यमुक्त करके वापस उनके मूल विभाग में नहीं भेजा जा रहा है। कर्मचारी नेताओं ने एक स्वर में नगर निगम प्रशासन को चेतावनी दी कि 15 दिन के अंदर अगर प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों को वापस उनके मूल विभाग में नहीं भेजा गया तो संगठन निगम कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन, अधिकारियों का घेराव एवं क्रमिक अनशन और आमरण अनशन पर जाने का निर्णय ले सकता है। जिसके कारण शहर की जलापूर्ति एवं सीवर व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिसके पूर्ण जिम्मेवारी नगर निगम प्रशासन की होगी।

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