शिक्षा मंत्री ने आकाश को वर्ल्ड बुक ऑफ अवार्ड से किया सम्मानित

शिक्षा मंत्री ने आकाश को वर्ल्ड बुक ऑफ अवार्ड से किया सम्मानित

रणबीर रोहिल्ला, सोनीपत। हरियाणा के शिक्षा मन्त्री कंवर पाल गुज्जर के करकमलों से लन्दन, यूनाइटेड किंगडम द्वारा सोनीपत के प्रसिद्ध कला विशेषज्ञ नरेश कुमार आकाश को वर्ल्ड बुक आफॅ अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वर्ल्ड बुक ऑफ अवार्ड के प्रतिनिधि रविकांत शर्मा ने बताया सोनीपत के प्रसिद्ध कला विशेषज्ञ एवम् कलाश्री अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संस्थापक नरेश कुमार आकाश को उनके द्वारा कला एवम् शिक्षा के क्षेत्र में किये गये 34 वर्षों के अतुलनीय कार्यों के लिए यह अवार्ड, यूनाइटेड किंगडम, लन्दन के द्वारा उनकी उपलब्धियों पर वर्ल्ड बुक ऑफ अवार्ड के प्रेजिडेंट सन्तोष शुक्ला, ब्रिटिश पार्लियामेंट के वीरेन्द्र शर्मा ने बधाई प्रेषित की है।

अवार्ड हरियाणा के शिक्षा मन्त्री कंवरपाल गुर्जर द्वारा प्रदान किया गया है। शिक्षा, कला एवम् संस्कृति मन्त्री कंवर पाल गुज्जर ने नरेश आकाश को बधाई देते हुए कहा यह हरियाणा के लिए गौरव की बात है कि नरेश आकाश जैसे व्यक्ति बच्चों को कला की रोजगार उन्मुख शिक्षा प्रदान करके उन्हें स्वावलंबी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। वर्ल्ड बुक ऑफ अवार्ड में किसी का नाम दर्ज होना स्वंय में गौरव की बात है। नरेश आकाश ने यह सम्मान अपने शिष्यों को समर्पित करते हुए कहा कि प्रत्येक अध्यापक को मिलने वाले सम्मान के सही हकदार उसके शिष्य होते हैं। एक अध्यापक को जीवन में उसके शिष्यों के कारण ही सम्मानित किया जाता है। मेरे शिष्य ही मेरी प्रेरणा मेरी ऊर्जा स्त्रोत हैं।

मेरा सौभाग्य है कि मुझे रणजीत, सज्जन, पंकज शर्मा, योगेश, मनीष, सन्नी, सागर, संजीव, सौरभ आदि अनेकानेक ऐसे शिष्य मिलें, जिन्होंने मेरा अपने माता-पिता और विद्यालय का नाम रोशन किया। किसी भी व्यक्ति को मिलने वाला सम्मान किसी एक व्यक्ति विशेष का सम्मान नहीं होता। नरेश आकाश का कहना था कि इसमें सबका सामूहिक प्रयास और योगदान होता है। वर्ल्ड बुक ऑफ अवार्ड द्वारा दिये गये इस सम्मान का श्रेय मेरी कर्मस्थली एसएम हिन्दू स्कूल सोनीपत के समस्त स्टाफ व उस विद्यालय की प्रबन्धक समिति को भी जाता है, जिसने समय-समय पर मुझे प्रोत्साहित किया और कला और शिक्षा के क्षेत्र में मेरे द्वारा किये गये प्रयोगों को ना केवल अपना समर्थन दिया, अपितु पूर्ण सहयोग भी दिया। नरेश आकाश ने भावी योजना के विषय बताया कि अध्यापन् कार्य से सेवानिवृत्ति के पश्चात् भारतीय कला एवम् संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करने के लिए मेरा जीवन समर्पित रहेगा।

उल्लेखनीय है कि नरेश आकाश के हजारों शिष्य कला के विभिन्न क्षेत्रों में देश और विदेशों में सोनीपत का और उनका नाम रोशन कर रहें हैं। उन्होंने कला व शिक्षा के लिए कई पुस्तकें लिखी हैं, अनेक वर्षों से वे कला की उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को ना केवल प्रोत्साहित कर रहें हैं, बल्कि नि:शुल्क प्रशिक्षण भी दे रहें हैं। उनके बहुत से शिष्य कला अध्यापक के रूप में उनके पदचिन्हों पर चलकर उनका व सोनीपत का नाम रौशन कर रहे हैं। इसके लिए वर्ल्ड बुक ऑफ अवार्ड की एक गहन एवम् जटिल प्रक्रिया होती है, जिससे गुजरने व साक्षात्कार के पश्चात ही किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति का नाम दर्ज होता है। कलाश्री अकादमी के राष्ट्रीय  महासचिव पण्डित नीलकण्ठ आकाश एवम् अकादमी की कोषाध्यक्ष सरिता आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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