इंदिरा गांधी द्वारा लगाई इमरजेंसी का काला दिन भुलाए नहीं भूलता : मोर्चा

इंदिरा गांधी द्वारा लगाई इमरजेंसी का काला दिन भुलाए नहीं भूलता : मोर्चा

लोकतंत्र खतरे में है का नारा लगाने वाली कांग्रेस इमरजेंसी का काला समय क्यूं भूल जाते है : एडवोकेट नेहा धवन

राजेश क्वात्रा हांसी, हिसार। भारतीय जनता पार्टी की महिला नेत्री, फ़तेहाबाद ज़िला प्रभारी एडवोकेट नेहा धवन ने आज का दिन लोकतंत्र के नाम पर काला दिवस के रूप में बताते हुए भाजपा महिला मोर्चा हरियाणा के वेबिनार को संबोधित किया। नेहा धवन ने कहा कि आज के दिन 25 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने देश के प्रधानमंत्री होते हुए देश की जनता, विपक्ष की राजनीतिक पार्टी के नेताओं, देश के मीडिया अख़बार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं के साथ जो विश्वासघात किया, उनके सभी कानूनी अधिकार छीन लिए और संविधान की धारा 352 के तहत अपने ओहदे व पद का ग़लत इस्तेमाल करते हुए इमरजेंसी लगाई। वो समय भुलाए नहीं भूल सकता।

जनसंघ या भारतीय जनता पार्टी के पुराने कार्यकर्ता आज भी जब उस बुरे समय को याद करते है उनका दिल सिहर उठता है। एडवोकेट धवन ने बताया कि आज का दिन प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, प्रदेश प्रभारी संतोष यादव, प्रदेश अध्यक्षा सुमित्रा चौहान के निर्देशन में हरियाणा की सभी महिला कार्यकर्ताओं ने काले दिवस के रूप में आज का दिन आम जनता, युवा पीढ़ी के साथ उस समय के भयावह स्थिति को अवगत करवाया। संतोष यादव ने बताया कि विपक्ष को खत्म करने, जनता की आवाज़ को बंद करने के लिए लोकतंत्र की हत्या कर दी। इंदिरा की कांग्रेस सरकार ने मनमानी करते हुए अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए मनमानी से देश को चलाया।

सुमित्रा चौहान ने मंडल स्तर पर आज का काला दिवस मनाने और आज की पीढ़ी को उस वक़्त के तानाशाही शासन की जानकारी देने को कहा। जनसंघ के कार्यकर्ता गोविंद राय ने इमरजेंसी के वक़्त जब वो युवा थे कैसा समय, कैसी प्रताड़ना झेली सभी महिला कार्यकर्ताओं के साथ सांझा किया। उन्होंने बताया कि उस वक़्त राष्टवादी विचारधारा का पतन करने की इंदिरा के कांग्रेस सरकार ने ठान ली। जेलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया। जेल में यातनाएं दी गयी। कारोबार नष्ट हो गया। घर परिवार से दूर सरकार से बचते बचाते दिन काटे। नेहा धवन ने इमरजेंसी समय के सभी कार्यकर्ताओं के साथ अपने पिता देशराज धवन को याद करते हुए जो हमारे साथ है और जो सूक्ष्म रूप में साथ है लोकतंत्र की रक्षा करते हुए इमरजेंसी में लड़े उनके बलिदान को याद किया।

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