स्त्री अस्तित्व का संघर्ष पुस्तक का विमोचन

स्त्री अस्तित्व का संघर्ष पुस्तक का विमोचन

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने किया पुस्तक का विमोचन 

राजेश क्वात्रा, राजेश सलूजा, हिसार। ग्रीन लिटरेचर साहित्य मंच के अंतर्गत सर्व भाषा ट्रस्ट दिल्ली द्वारा हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘स्त्री अस्तित्व का संघर्ष’ काव्य एवं ग़ज़ल संग्रह का विमोचन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने किया। इस सद्य: प्रकाशित पुस्तक का संपादन हिसार से गुरुजम्भेश्वर साइंस एंड टेक्निकल विश्वविद्यालय की हिंदी विभाग की सहायक प्रोफेसर डा. गीतू धवन भुटानी, दयाल सिंह कॉलेज के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुभाष सैनी एवं हांसी से सोशल पोलिटिकल एक्टिविस्ट एडवोकेट नेहा धवन ने किया है। पुस्तक का कलात्मक आवरण और पृष्ठ सज्जा ग्राफिक डिज़ाइनर शुभम ने तैयार की है।

इस पुस्तक में पंजाबी, हरियाणवी, मुलतानी और हिंदी भाषाओं में 60 रचनाकारों ने अपनी 103 काव्यात्मक अभिव्यक्तियां दी हैं। पूरे भारत के अलग अलग राज्यों से रचनाकारों को जोड़ा गया है। इस पुस्तक में चैन्नई, रायपुर, छत्तीसगढ़, मुम्बई, कोलकाता, दिल्ली, इंदौर, कानपुर उत्तरप्रदेश, पुणे महाराष्ट्र, होशियारपुर पंजाब, जोधपुर राजस्थान सहित हरियाणा के विभिन्न राज्यों के बहुत से प्रख्यात रचनाकारों की उत्कृष्ट रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।एडवोकेट नेहा धवन ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्ष से जहां सारा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है।

वहीं इस मुश्किल समय को हमने ताकत बनाते हुए और समय का सदुपयोग करते हुए रचनात्मक कार्य करने की ठानी। स्त्री विमर्श और चिंतन विषय आज समाज में बहुत जरूरी है। स्त्री अस्तित्व व उनके संघर्षों को सही भावों व शब्दों के साथ वख्यायित करती यह पुस्तक हमने  काव्य-ग़ज़ल संग्रह के रूप में तैयार किया है। जो स्त्री के अनगिनत संघर्षों के प्रश्नों को हमारे समक्ष लाता है। क्योंकि आज का रचनाकार, नई रचनाओं में स्त्री को नए संदर्भों में व्यक्त कर रहा है। स्त्री मानवीय गरिमा से युक्त होकर एक चुनौती बनकर उभर रही है। भाजपा हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने इस पुस्तक प्रकाशन की बधाई देते हुए एडवोकेट नेहा धवन के इस रचनात्मक प्रयासों की काफी सराहना की।

उन्होंने कहा कि स्त्री अस्तित्व का संघर्ष पुस्तक की खूबसूरती ये है कि देश भर से रचनाकार इस पुस्तक के माध्यम से जुड़े। हर वर्ग , उम्र व स्त्री के हर किरदार के संघर्षों को इस पुस्तक में बखूबी उकेरा गया है। 21वीं सदी में अंत्योदय की भावना रखते हुए कमज़ोर व पिछड़ी हुई महिलाओं की मुख्य धारा, मेन स्ट्रीम के साथ जोड़ने की प्रेरणा यह पुस्तक दे रही है। ओमप्रकाश धनखड़ ने संपादकों व सभी रचनाकारों को पुस्तक प्रकाशन की बधाई देते हुए विमोचन किया। संपादकों ने बताया कि इस पुस्तक का कलेवर एक ओर जहां पाठकों को आकर्षित कर रहा है, वहीं इसकी पठनीय सामग्री निश्चित रूप से  साहित्य में अभिवृद्धि करेगी। इस अवसर पर एडवोकेट नेहा धवन हांसी, ऊषा प्रियदर्शी, हरविंदर कोहली उपस्थित थे।

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