मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना बच्चों के लिए साबित होगी संजीवनी : मनोज चन्द्रवंशी

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हिसार, राजेश सलूजा। कोरोना महामारी के कारण से निराश्रित हुए बच्चों के लिए आरंभ की गई मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना बालको के लिए संजीवनी साबित होगी। योजना के तहत शिक्षा सहायता, स्वास्थ्य बीमा तथा आर्थिक सहायता के प्रावधान किए गए हैं। जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य एडवोकेट मनोज कौशिक चन्द्रवंशी ने जानकारी देते हुए बताया कि निराश्रित बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ दिलाने के लिए जिला बाल कल्याण समिति कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त हेल्पलाइन नंबर 1098 या बाल कल्याण समिति कार्यालय से अथवा जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क कर ऐसे बच्चों की सूचना दी जा सकती है।

एडवोकेट चन्द्रवंशी ने बताया कि योजना के अंतर्गत ऐसे बच्चों को चिन्हित किया जा रहा है। इस कार्य में बाल कल्याण समिति बेहद संजीदगी से कार्य कर रही है। योजना के अंतर्गत 10 वर्ष से कम आयु के निराश्रित बच्चों की स्कूली शिक्षा के लिए नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में डे-स्कॉलर के रूप में दाखिले की व्यवस्था की गई है। निजी स्कूल में दाखिले पर पीएम केयर्स से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत फीस, वर्दी, पाठ्य पुस्तकें व नोटबुक मुहैया करवाई जाएंगी। चन्द्रवंशी ने बताया कि 11 से 18 वर्ष की आयु के निराश्रित बच्चों के लिए सैनिक स्कूल व नवोदय विद्यालय जैसे आवासीय विद्यालय में भी दाखिले की सुविधा दी गई है।

निजी स्कूलों में दाखिले के लिए पीएम केयर्स से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत फीस, वर्दी, पाठ्य पुस्तकें व नोटबुक उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। दादा-दादी या परिवार की देखरेख में रहने वाले बच्चे के लिए निकटतम केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में डे-स्कॉलर के रूप में दाखिले का प्रावधान किया गया है। ऐसे बच्चों के लिए उच्च शिक्षा के लिए भी सहायता के प्रावधान किए गए हैं। देश में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों या उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण दिलाने मेंं बच्चे की मदद करने के साथ-साथ ऋण के ब्याज का भुगतान पीएम केयर्स फंड से किया जाएगा। ऐसे बच्चों को स्नातक या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत शिक्षा शुल्क या पाठ्यक्रम शुल्क के बराबर छात्रवृत्ति दी जाएगी। जो बच्चे मौजूदा छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत पात्र नहीं हैं, उनके लिए पीएम केयर्स के तहत समान छात्रवृत्ति सुविधा दी जाएगी।

स्वास्थ्य बीमा सुविधा के तहत ऐसे सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा तथा 18 वर्ष तक की आयु के इन बच्चों की प्रीमियम की राशि का भुगतान पीएम केयर्स द्वारा किया जाएगा।  इसके अलावा, ऐसे बच्चों को 18 वर्ष की आयु से अगले 5 वर्षों तक उच्च शिक्षा की अवधि के दौरान मासिक वित्तीय सहायता या छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी तथा 23 वर्ष की आयु पूरी करने पर व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक उपयोग के लिए एकमुश्त राशि प्रदान की जाएगी।

एडवोकेट चन्द्रवंशी ने बताया कि इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा ऐसे प्रत्येक बच्चे को 18 वर्ष की आयु तक 2500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाएगी। बेसहारा बच्चों की देखभाल करने वाले बाल देखभाल संस्थान को, बच्चे की 18 वर्ष तक की आयु तक प्रति बच्चा 1500 रुपये प्रतिमाह की दर से सहायता राशि प्रदान की जाएगी। अन्य पूरा खर्चा बाल देखभाल संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा। सरकार द्वारा 18 वर्ष की आयु तक पढ़ाई के दौरान अन्य खर्चों के लिए भी 12 हजार रुपये प्रति वर्ष की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। 8वीं से 12वीं या व्यावसायिक पाठ्यक्रम में किसी भी कक्षा में पढऩे वाले बच्चों को टैबलेट दिए जाएंगे।

एडवोकेट चन्द्रवंशी ने कहा कि हम माननीय मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का धन्यवाद व्यक्त करते हैं जो उन्होंने इस आपातकाल में बच्चों के हित में ऐसी बाल हितकारी योजना लागू की।माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा घोषित यह योजना महामारी में माँ बाप को खो चुके बालकों के अंधेरे जीवन में प्रकाश का काम करेगी।

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