साइकिल चलाना सेहत के लिए फायदेमंद : बृजमोहन रोहिला

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Brijmohan Rohilla
सोनीपत। विश्व रोहिल्ला राजपूत संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन रोहिल्ला।

साइकिल चलाने से होता है शारीरिक व्यायाम : अनिता रानी

रणबीर रोहिल्ला, सोनीपत। साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना गया है। साइकिल चलाने से पूरे शरीर का व्यायाम होता है। इसलिए आसपास के छोटे-मोटे काम हम साइकिल के द्वारा जाकर भी कर सकते हैं। साइकिल चलाने से एक तो वातावरण शुद्ध रहता है, दूसरा पैसे की बचत भी होती है। उक्त बातें विश्व रोहिल्ला राजपूत संघ ट्रस्ट के मुख्य संरक्षक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन रोहिल्ला एवं हरियाणा महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती अनीता रानी रोहिल्ला ने आमजन को विश्व साइकिल दिवस की बधाई देते हुए कही।

विश्व रोहिल्ला राजपूत संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन रोहिल्ला ने कहा कि कुछ साल पहले तो इंसान भागदौड़ भरी जिंदगी में इतना व्यस्त रहता था कि वह अपने शरीर पर बहुत कम ध्यान दे पाता था, पिछले साल से कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में लगे लॉकडाउन में आमजन को घरों में कैद होना पड़ा। जिसके कारण लोगों की दिनचर्या में बदलाव हो गया।

सोनीपत। विश्व रोहिल्ला राजपूत संघ की हरियाणा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं शिक्षिका श्रीमती अनीता रानी।

संघ की हरियाणा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं शिक्षिका श्रीमती अनीता रानी रोहिल्ला ने कहा कि युवा वर्ग अच्छे स्वास्थ्य के लिए जिम के जाकर व्यायाम करने के साथ-साथ साइकिल भी चलाते हैं, जिससे उनका शरीर स्वस्थ रहता है। उन्होंने कहा कि पहले साधनों की कमी के कारण मनुष्य साइकिल से ही एक-दूसरे गांव आते-जाते थे, जिससे उनके पूरे शरीर का शारीरिक व्यायाम हो जाता था। साइकिल चलाने से शरीर कई बीमारियों से बचा रहता है। इसलिए शहर या गांव के अन्दर कुछ कार्य करने के लिए आना-जाना हो तो साइकिल का प्रयोग करना चाहिए, जिससे वातावरण के साथ-साथ शरीर भी स्वस्थ रहे।

2 COMMENTS

  1. बड़े भाई बृजमोहन जी रोहिल्ला और बहन श्रीमति अनीता रोहिल्ला जी की बात एक 100%सत्य है हम जब पहले आज से 10
    15साल पहले सारे काम साईकिल से किया करते थे स्वस्थ रहते थे भोजन प्रक्रिया भी ठीक थीं अब तो सारी दिनचर्या ही खराब हो गई है
    आपका भाई सत्यवीर सिंह छौंकर भरतवंशी राजपूत पृचार मंत्री फरीदाबाद टीम

    • जी सत्यवीर सिंह छौकर जी पहले जब हम साइकिल चलाते थे तो पूरी तरह से स्वस्थ रहते थे। जब से बाइक, कार चलाने लग गए तब से जीवन डाक्टरों पर निर्भर हो गया है।

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