पानी के स्रोत तेजी से खत्म हो रहे : वत्स

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सोनीपत। मंच के राज्य सचिव कृष्ण वत्स।
सोनीपत। मंच के राज्य सचिव कृष्ण वत्स।

आज जल, जंगल व जमीन सभी पर्यावरणीय संकट से गुजर रहे

रणबीर रोहिल्ला, सोनीपत। हरियाणा विज्ञान मंच की ओर से पृथ्वी दिवस पर एक वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता राज्य सचिव कृष्ण वत्स ने पृथ्वी दिवस के थीम अपने ग्रह को पुनस्थापित करें पर बोलते हुए कहा कि ब्रह्मांड में ज्ञात अरबों ग्रहों में केवल पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है, जहां जीवन है, इसलिए पृथ्वी ग्रह को मां के रूप में देखा जाता है। लेकिन दिन-ब-दिन पृथ्वी की स्थिति दयनीय होती जा रही है, इसके लिए पृथ्वी पर ज्ञात लाखों प्रजातियों में से केवल मनुष्य जिम्मेवार है, जो इसके संसाधनों को बिना चिंता किए न केवल भोग रहा है, बल्कि अत्याधिक दोहन कर रहा है।

आज जल, जंगल व जमीन सभी पर्यावरणीय संकट से गुजर रहे हैं। बढ़ता तापमान व अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन आज सबसे बड़ी चुनौती हैं, सिकुड़ते अंटार्कटिका, हिमालय के ग्लेशियर व हिमस्खलन के कारण चमोली में हुई घटना यह दर्शाती है। महामारी के कारण धीमी हुई आर्थिक गतिविधियों के बाद भी 2020 को सबसे गर्म साल बताया गया है। औद्योगिक क्रांति के बाद दुनिया के आधे से ज्यादा वनों के कटान के कारण जल चक्र प्रभावित होने से वर्षाजनित नदियां संकटग्रस्त हैं। पानी के स्रोत तेजी से खत्म हो रहे हैं, जोकि एक बहुत बढ़े संकट का संकेत है। यह साल मानवता भविष्य के लिए बहुत नाजुक है। आईपीसीसी रिपोर्ट हमें बता रही है कि हमारे पास नष्ट करने के लिए समय नहीं है, क्योंकि जलवायु का विनाश होता जा रहा है। हमें प्रकृति पर युद्ध खत्म करना होगा, नहीं तो इस ग्रह पर जीवन का होना भूतकाल की कहानी हो जायेगा, जिसके हम सभी जिम्मेदार होंगे। जीवन के अस्तित्व के लिए स्वच्छ ग्रह स्वैच्छिक नहीं अपितु आवश्यकता है।

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