कोई भी बच्चा न रहे आउट ऑफ स्कूल

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Rajesh sulijaसघन सर्वे कर सुनिश्चित करें सात से चौदह वर्ष के हर बच्चे का नामांकन, एडीसी ने ली शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक, समयबद्ध व योजनाबद्ध तरीके से सर्वे करने के दिये कड़े निर्देश

राजेश सलूजा, कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त उपायुक्त महावीर सिंह ने कहा कि सात से चौदह वर्ष का कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे और शत प्रतिशत बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित होना चाहिए। इस कार्य में किसी प्रकार की कोताही व ढिलाई सहन नहीं की जाएगी। वे मंगलवार को राजकीय आर्दश विद्यालय के सभागार में आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान के लिए आयोजित किये जाने के विषय पर आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। एडीसी महावीर सिंह ने कहा कि सर्वे के दौरान ऐसे बच्चे जो झुग्गी झोपडी में रहते हो, गली में कचरा बीनने वाले हो, भीख मांगने वाले हो या ऐसे बच्चे जिनके माता पिता ना हो और वे स्कूल ना जा रहे हो, मजदूर जो काम की तलाश में अपने जिले में आए हों पर विशेष ध्यान देना होगा। नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा हर बालक का अधिकार है और उसे यह अधिकार प्राप्त हो यह हम सब की जिम्मेदारी है।

किसी भी बच्चे के विद्यालय से वंचित रहने का प्रभाव न केवल उसके व्यक्तिगत जीवन या एक परिवार पर पड़ता है बल्कि इससे पूरा समाज प्रभावित होता है। एडीसी व समग्र शिक्षा के अध्यक्ष महावीर सिंह ने की अध्यक्षता में सम्पन्न इस बैठक में जिले भर में सर्वे आयोजित करने की विस्तृत योजना बनाई गई तथा सभी सम्बंधित अधिकारियों की जवाबदेही व जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई। कब, कहाँ और कैसे सर्वे होगा और कैसे इसकी रिपोर्टिँग व मोनिटरिंग होगी अब बिंदुओं पर विचार किया गया। जिला परियोजना संयोजक इस सर्वे के नोडल अधिकारी रहेंगे व सभी खण्डों में इसके क्रियान्वन, निरीक्षण व डाटा संकलन का कार्य देखेंगे। खण्ड स्तर पर सर्वे के नोडल अधिकारी खण्ड शिक्षा अधिकारी रहेंगे व सभी संकुल संसाधन केन्द्रों में इसके क्रियान्वन, निरीक्षण व डाटा संकलन का कार्य देखेंगे। यह सुनिश्चित करना इनकी जिम्मेवारी रहेगी कि उनके खण्ड का कोई भी भाग इस सर्वे से अछूता न रहे। संकुल स्तर पर इसी प्रकार इस सर्वे के नोडल अधिकारी संकुल संसाधन संयोजक रहेंगे।

वे अपने क्षेत्र के उन जगहों को चिन्हित करेंगे जहां पर इस प्रकार के बच्चे जो विद्यालय जाने से वंचित हैं, का सर्वे अपने स्कूल मुखियों के सहयोग से करेंगे। इस कार्य के लिए वे अपने अधीन एबीआरसी आदि की डयूटी लगाएगे।  विद्यालय स्तर पर विद्यालय मुखिया अपने विद्यालय के सभी अध्यापक, एस.एम.सी. सदस्य, पंचायत सदस्यों, आंगनवाड़ी वर्कर्स, गांव के नम्बरदार व एन.जी.ओ. आदि की सहायता से अपने गांव को अलग-अलग भागों में बांटेंगे और आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान करेंगे।अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि फील्ड में कार्य करने वाले सभी अध्यापक, एस.एम.सी. सदस्य, पंचायत सदस्यों, आंगनवाड़ी वर्कर्स,गांव के नम्बरदार व एन.जी.ओ. के सदस्य इस कार्य को सम्पन्न करेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यालय मुखिया यह सुनिश्चित करेंगे कि उसके गांव/क्षेत्र में आयु वर्ग 7 से 14 साल का बच्चा आउट ऑफ स्कूल न हो और इसके लिए विद्यालय मुखिया को 100 प्रतिशत सर्वे करने का सर्टिफिकेट देना होगा। सर्वे का पूरा रिकॉर्ड खण्ड स्तर पर तैयार करेंगे। अधिकारी व्हाट्सएप ग्रुप बनाएंगे जिसमें वे प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट अपडेट करेंगे।

जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री ने बताया कि सभी विद्यालय मुखिया यह सुनिश्चित करें कि 4 मार्च तक तक अपने विद्यालय स्तर का सर्वे पूरा हो जाए। सर्वे करवाकर इसकी हार्ड व सर्वे की प्रति संकुल संसाधन केन्द्र पर जमा करवाएंगे। इसके पश्चात् 5 मार्च को संकुल संसाधन संयोजक के पास रिपोर्ट दें और सीआरसी 8 मार्च तक अपने संकुल संसाधन केन्द्र पर सभी अधीनस्थ विद्यालयों का डाटा संकलित करके संबंधित खण्ड संसाधन केन्द्र पर जमा करवाएंगे। इसी प्रकार 15 मार्च तक जिला परियोजना संयोजक कार्यालय द्वारा डाटा संग्रहित करके राज्य मुख्यालय को निर्धारित प्रपत्र पर जमा करवाया जाना है। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री, डिप्टी डीईओ विनोद कौशिक, बलजीत मालिक, समग्र शिक्षा के डीपीसी रामदिया गागट, एपीसी संजय कौशिक, सुनील कौशिक, डॉ कृष्णा, बीइओ संतोष शर्मा सहित सभी खंड शिक्षा अधिकारी, संकुल संसाधन अधिकारी, एबीआरसी, बीआरपी व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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