हरियाणा में अब 112 करोड़ का मीटर खरीद घोटाला, नहीं हो रही कोई कार्रवाही

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\अशोक छाबड़ा, जींद। बिजली निगम में 112 करोड़ 99 लाख रुपए का मीटर खरीद घोटाला सामने आया है। विजिलेंस जांच में चीफ इंजीनियर और 3 एस.ई. समेत सात अधिकारियों को दोषी माना गया है, लेकिन जांच रिपोर्ट मिलने के दो माह बाद भी इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। बिजली निगम की एमएम विंग ने साल 2014-2015 में दो कंपनियों से सिंगल फेज मीटर खरीदे थे, जिसमें यह गड़बड़ी मिली है। अनियमितता बरतकर न केवल दो कंपनियों को करोड़ों रुपये का फायदा पहुंचाया गया, बल्कि बिजली निगम और उपभोक्ताओं को भी चूना लगाया गया है। इस मामले में हरियाणा पावर इंजीनियर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष केडी बंसल की शिकायत पर बिजली निगम के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीसी गुप्ता ने सीएमडी को विजिलेंस जांच के निर्देश दिए थे। विजिलेंस ने 31 मई को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में दोनों मामलों में बिजली निगम के चीफ इंजीनियर आरके जैन, एसई एसएस कंटूरा, एसई अनिल गोयल व अनिल बंसल, एसडीओ हितेश के अलावा एक एक्सईएन व एक एस.डी.ओ. को दोषी करार दिया है। विजिलेंस ने चीफ इंजीनियर पर मेजर पेनल्टी, जबकि अन्य पर माइनर पेनल्टी लगाने की सिफारिश की है। विजिलेंस की रिपोर्ट मिलने के बाद सीएमडी ने दो डायरेक्टरों की कमेटी गठित कर दी है, जिसकी जांच जारी है। हालांकि, सीएमडी का कहना है कि दोषियों को चार्जशीट कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि एमएम विंग के चीफ इंजीनियर आरके जैन ने कंपनी के साथ मिलीभगत करके 11 सितंबर 2015 को डब्ल्यूटीडी यानी होल टाइम डायरेक्टर, 21 सितंबर व 6 अक्तूबर 2015 को कॉमन स्पेसिफिकेशन कमेटी (सीएससी), जबकि 4 दिसंबर 2015 को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (बीओडी) की बैठक में तथ्यों को तोड़-मरोडक़र मैनेजमेंट से 8 लाख 60 हजार मीटरों की खरीदारी के लिए अप्रूवल ले ली। निगम प्रबंधन ने 5 सितंबर 2015 को एसई आरके जैन को एमएम विंग में ही चीफ इंजीनियर बना दिया। चीफ इंजीनियर बनने के बाद आरके जैन ने मेमोरेंडम आइटम नंबर 119.15 के तहत डब्ल्यूटीडी की बैठक में 20 हजार रिजेक्ट किए गए मीटरों की मंजूरी दिलवा दी।

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