भाईचारे की मिशाल है गांव ढाकल

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प्रगति के पथ पर अग्रसर है यह प्राचीन गांव ढाकल, शूरवीरों की भूमि व भाईचारे की मिशाल है गांव ढाकल, प्रगति के पथ पर अग्रसर है यह प्राचीन गांव, जिला महिला पार्षद पिंकी व युवा अमित श्योकन्द ने दिलवाई गांव को पहचान                              नरवाना (जींद)। सिरसा लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत नरवाना से सटा गांव ढाकल महान देशभक्त शूरवीरों, खिलाड़ियों एवं कलाकारों की भूमि है। जींद जिला का यह प्राचीन गांव भौगोलिक दृष्टि से हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित है।इस गांव का इतिहास बहुत पुराना एवं गौरवशाली है। यह गांव निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इस गांव में करोड़ों रूपयों की ग्रांट से अनेक विकास कार्य किये  गये हैं जिससे ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हुई हैं यह कहना है गांव की प्रगतिशील सोच के धनी जिला परिषद की सदस्या पिंकी व युवा अमित का। उन्होंने गांव को विकास कार्यों एवं सामाजिक कार्यों में नई पहचान दिलवाई है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के डी आई पी आर ओ सुरेन्द्र कुमार वर्मा ने विभाग की सांस्कृतिक टीम के साथ रात्री ठहराव कार्यक्रम के तहत गांव ढाकल का दौरा किया और जिला पार्षद पिंकी, अमित,व अन्य ग्रामीणों से विकास कार्यों बारे चर्चा की। डी आई पी आर ओ सुरेन्द्र वर्मा ने केन्द्रीय व हरियाणा सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों जल शक्ति अभियान,स्वच्छ भारत मिशन, पौधारोपण अभियान,पर्यावरण व जल संरक्षण, आयुष्मान योजना,मेरा परिवार-मेरी पहचान आदि बारे ग्रामीणों को जानकारी दी। गांव में स्थापित गौरवपट्ट से साफ झलकता है कि इस गांव की पवित्र भूमि ने महान शूरवीरों व खिलाडियों को जन्म दिया है। गांव में प्रवेश करते ही अण्डर ब्रिज पुल के पास स्थापित शहीद सुरेश कुमार कुण्डू (6 जाट रेजिमेंट) की प्रतिमा लोगों को राष्ट्रीयता की प्रेरित करती है।शहीद के नाम पर हरियाणा सरकार ने मान-सम्मान देने के उद्देश्य से ढाकल से नरवाना लिंक रोड का निर्माण भी करवाया है और शहीद की बेटी मधु को सरकारी नौकरी प्रदान की , जो एसडीएम नरवाना ऑफिस  में लिपिक के पद पर कार्यरत है। गांव के कलाकार जयपाल सिंह, रामकरण, महताब, मनजीत कुण्डू व सूबेदार नन्दसिंह, सत्यनारायण व सोनू के अनुसार गांव के लगभग 150 फौजी वर्तमान में देश सेवा कर रहे हैं जिनमें 21 सालों बाद पहली बार घणघस पत्ती से सुमित सेना में गया है और एक साल से दिल्ली में कार्यरत हैं।इसके अलावा सिविल सर्विसेज में गांव के लगभग 200 डाटा ओपरेटर चण्डीगढ व विभिन्न जगहों पर लगे हुए हैं।गौरवपट्ट पर ही गांव के कर्नल रिसालदार,विष्णुदत्त शर्मा,स्वतन्त्रदीप व आकाशदीप एवं लेफ्टिनेंट कर्नल बलिन्द्र के नाम अंकित हैं। खेल विभूतियों में कुमारी दर्शन कुण्डू(इन्टरनैशनल हैण्डवाल), सुमित कुण्डू(नैशनल लेवल पर गोल्ड मैडल), प्रिंस कुण्डू(नैशनल लेवल पर कबड्डी में गोल्ड मैडल)के नाम उल्लेखनीय हैं जिन्होंने गांव व प्रदेश,देश का नाम ऊंचा किया है। गांव के बुजुर्ग रवि शर्मा, ओमप्रकाश, रामचन्द्र, रामकुमार, मांगेराम,बलवन्त, सरपंच रामदेई व जयभगवान, पंचायत समिति सदस्य बलवानसिंह एवं युवा अमित श्योकन्द का कहना है कि बहुत समय पहले यहां ढकला तालाब /तीर्थ में नहाने होते थे और दूर-दराज से लोग भी नहाने के लिए आते थे।तालाब का पानी स्वच्छ होता था और दूध में भी बरता जाता था।इसी ढकला के नाम पर इस गांव का नामकरण ढाकल  पड़ गया।गांव के बीच में लोगों की आस्था का केन्द्र श्री बाबा बलवानपुरी जी की समाधि व मंदिर बना हुआ है।ढाकल सीसर व अन्य दानवीरों के सहयोग से 550 वर्ष प्राचीन समाधि का निर्माण कार्य 23-7-1989 को सम्पूर्ण हुआ।इसके सामने पीपल का पेड़ सुन्दरता को निहार रहा है।

प्रत्येक रविवार को यहां लगती है धोक दूर-दराज से भी लोग  समाधि पर श्रद्धा से माता टेकते हैं।लगभग 15 हजार की आबादी वाले इस गांव में विभिन्न जातियों के लोग आपसी भाईचारे से रहते हैं। गांव में गोगामेडी का मन्दिर भी है जिस पर एक तरफ शिव अवतार गुरू गोरखनाथ जी व दूसरी ओर जाहर वीर गोगा जी की प्रिंट फोटो लगा हुई है।गोगामेडी मन्दिर के लगते तालाब व फुलवाड़ी- पौधों से एवं स्टील केज ब्रिज पुल से गांव का दृश्य सुहावना लगता है।गांव में एक राजकीय प्राइमरी स्कूल व एक राजकीय हाई स्कूल भी है। गांव का रकबा लगभग 42 सौ एकड़ है जिसमें से आधी भूमि की सिंचाई न्यू सीसर माईनर,ढाकल माईनर व थोड़ी सी नरवाना माईनर से भी होती है। गांव के बीच घणघस चौंक में त्रिवेणी नीम,पीपल व बड के साथ-साथ बैठने के लिए अच्छा प्रबन्ध किया हुआ है।.   जिला पार्षद पिंकी व अमित के अनुसार गांव की फिरनी गली निर्माण पर  लगभग 80 लाख रूपये खर्च कर कार्य पूरा किया गया।इसके अलावा मुख्यमंत्री घोषणा के तहत गांव ढाकल से  सीसर, ढाकल से सुदकैनखुर्द, ढाकल से सुदकैन कलां तीन सड़कें बनाई गई व गलियां,श्मशान शैड व अन्य विकास कार्य किये गये। सरकार की ओर से गांव की चार चौपालों के लिए लगभग 25 लाख रुपये मंजूर हुए हैं इनमें पाबडापत्ती चौपाल, भोजराज पत्ती चौपाल,विष्णुपत्ती चौपाल, अनुसूचित जाति सरोहापत्ती चौपाल शामिल हैं।गांव में डा०रामकिशन श्योकन्द एकमात्र पी एच डी हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं।इसके अलावा सुबेदार जगतराम, जगदीश शर्मा,मनफूल सिंह,मियां सिंह,जागर, भरतसिंह,नोरिया,नायब सूबेदार ओमप्रकाश,भी गांव के विकास कार्यों में सहयोग देते हैं। रात्री ठहराव कार्यक्रम में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कलाकारों द्वारा व सिनेमा यूनिट के माध्यम से भी सरकार की उपलब्धियों बारे ग्रामीणों को प्रेरित किया गया। ग्रामीणों ने कार्यक्रम की सराहना की और वर्तमान हरियाणा सरकार को जन हितैषी बताया। डी आई पी आर ओ ने जिला पार्षद पिंकी व अमित एवं अन्य लोगों को विभागीय प्रचार सामग्री भी प्रदान की। शहीद की प्रतिमा का अनावरण पूर्व सांसद सुरेन्द्र सिंह बरवाला द्वारा 9 दिसम्बर 2002 को किया गया था।

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